धूप आनी-जानी शय है
आज़मा कर देखिए
अपने दम पर छाया को ख़ुद
घर बुला कर देखिए
आएगी ख़ुशबू ही ख़ुशबू
बस जरा हस्ती मिटा कर देखिए
रोक लेते काँटे रास्ता
फूलों को अपना बना कर देखिए
मजबूरी में हमने तुमने लाख पी डाले गरल
एक ग़म ही ख़ुश हो कर सीने से लगा कर देखिए
हिल जाएगी सारी इमारत
नींव का बस एक ही पत्थर हिला कर देखिए
हिल जाएगी सारी इमारत
जवाब देंहटाएंबस नीव के उंगली दिखाइए
शानदार
वंदन
आपकी लिखी रचना "पांच लिंकों के आनन्द में सोमवार 03अगस्, 2026 को लिंक की जाएगी .... http://halchalwith5links.blogspot.in पर आप भी आइएगा ... धन्यवाद!
जवाब देंहटाएंसुंदर
जवाब देंहटाएंसुंदर सृजन
जवाब देंहटाएंसुंदर प्रस्तुति
जवाब देंहटाएंबहुत सुंदर
जवाब देंहटाएंसभी का बहुत शुक्रिया
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