पी रहे हैं जैसे कोई अज़ाब शर्तों पर
चलता तो है हर कोई दिल से
दिल है या है कोई मजाक शर्तों पर
रंगे-हिना की मस्ती में जो न डूबे
भला खिलता है दिल का गुलाब शर्तों पर
बेवफ़ाई है गर मुहब्बत का दूसरा नाम
खाई है दोनों तरफ़ जनाब शर्तों पर
चढ़ता उतरता रहता है ख़ुमार बेशक
कहाँ मिटता है दरिया-ए-चनाब शर्तों पर
जवाब देंहटाएंआपकी लिखी रचना ब्लॉग "पांच लिंकों का आनन्द" बुधवार 15 जनवरी 2026 को साझा की गयी है......... पाँच लिंकों का आनन्द पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!
अथ स्वागतम शुभ स्वागतम।
सुन्दर
जवाब देंहटाएंबहुत सुंदर
जवाब देंहटाएंबहुत खूब शारदाजी!
जवाब देंहटाएंसुंदर
जवाब देंहटाएंबहुत अच्छी ग़ज़ल. सादर अभिवादन
जवाब देंहटाएंआप अभी की हौसला अफ़ज़ाई का बहुत बहुत शुक्रिया
जवाब देंहटाएंबहुत सुंदर
जवाब देंहटाएंशर्तों पर आधारित दोस्ती और मोहब्बत का जो भाव आपने बयां किया है, वह बहुत सच्चा और गहरा है। पढ़ते समय मुझे अपने कुछ पुराने दोस्तों और रिश्तों की याद आ गई, जहाँ कभी-कभी परिस्थितियाँ भावनाओं के आगे भारी पड़ जाती थीं।
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