रविवार, 18 अक्टूबर 2026

किसकी आहट पर


ये किसकी आहट पर दरवाज़े ने सिसकी ली है 

ये किसकी याद ने आज फिर हिचकी ली है 


कितनी बरसियाँ मना लीं ग़म की 

गाहे-बगाहे फिर हवाओं ने दस्तक दी है 


कौन उतरा है खरा उम्मीदों पर 

ये तिलिस्म सी दुनिया भी अरमानों ने ढहा दी है 


उतरीं हैं जब सफ़हों पर लफ़्ज़ों में ठहर कर 

वीरानियों ने कितनी गुफ्तगू की है


क़िस्मत की चोटें,न मोहलत दें न मौक़ा ही दें 

जो कर गुजरें सो कर गुजरें , हमने तो बस लीपा-पोती की है 

8 टिप्‍पणियां:

Digvijay Agrawal ने कहा…

 आपकी लिखी रचना "पांच लिंकों के आनन्द में मंगलवार 20 अक्तूबर, 2026 को लिंक की जाएगी ....  http://halchalwith5links.blogspot.in  पर आप भी आइएगा ... धन्यवाद!

Anita ने कहा…

बेहतरीन शायरी

शुभा ने कहा…

सुंदर सृजन!

शारदा अरोरा ने कहा…

बहुत बहुत धन्यवाद दिग्विजय सिंह जी , लिंक को शामिल करने का भी और अपनी पोस्ट को यही शीर्षक देने का भी 🙏

सुशील कुमार जोशी ने कहा…

वाह

शारदा अरोरा ने कहा…

आभार

शारदा अरोरा ने कहा…

आभार

शारदा अरोरा ने कहा…

बहुत बहुत धन्यवाद