शुक्रवार, 26 मार्च 2010

थपक कौन सी

चुनरी सितारों से जड़ा रक्खी है
बिरहन ने कोई अलख जगा रक्खी है

रात कटती नहीं सब्र भी टूटा नहीं
दिल के साज पे बाशिन्दों को
थपक कौन सी सुना रक्खी है
बिरहन ने कोई अलख जगा रक्खी है

हर लम्हा है रात का आख़िरी लम्हा
रात के कानों में यही कह कर
आहट सुबह की सजा रक्खी है
बिरहन ने कोई अलख जगा रक्खी है

10 टिप्‍पणियां:

  1. kshama ने आपकी पोस्ट " बहुत दिन हुए जिन्दगी से मिले " पर एक टिप्पणी छोड़ी है:

    "Thapak kaunsi " behad sundar hai, lekin wahanka comment box nahi khul raha!
    thankyou , kshama ji ....iska ilaaj hua edit karke fir se publish karke ....sharda

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  2. वाह जी, बहुत खूब कहा! सुन्दर रचना.

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  3. रात कटती नहीं सब्र भी टूटा नहीं
    दिल के साज पे बाशिन्दों को
    थपक कौन सी सुना रखी है....
    शारदा जी, ’रात कटती नहीं सब्र भी टूटा नहीं’ इन पंक्तियों ने बांध लिया है.....
    जाने कब तक सोचने पर मजबूर करती रहेंगी ये पंक्तियां.

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  4. रात कटती नहीं सब्र भी टूटा नहीं
    दिल के साज पे बाशिन्दों को
    थपक कौन सी सुना रक्खी है
    बिरहन ने कोई अलख जगा रक्खी है
    kya gazab ka fan hasil hai aapko...aafreen!

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  5. आहट सुबह की सजा रक्खी है
    बिरहन ने कोई अलख जगा रक्खी है
    बहुत सुन्दर भाव

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  6. हर लम्हा
    है रात का आखिरी लम्हा
    रात के कानो में यह कह कर
    आहात सुबह कि सजा रखी है...

    बहुत खूब
    कहन के लिहाज़ से असरदार अलफ़ाज़ हैं
    अच्छी नज़्म के लिए बधाई

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  7. हर लम्हा है रात का आख़िरी लम्हा
    रात के कानों में यही कह कर
    आहट सुबह की सजा रक्खी है ..

    बहुत खूबसूरत हैं ये पंक्तियाँ ... आहट सुबह की ... लाजवाब लिखा है ...

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  8. एक अदभुत सोच
    वाह सुन्दर कविता के लिये आभार

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मैं भी औरों की तरह , खुशफहमियों का हूँ स्वागत करती
मेरे क़दमों में भी , यही तो हैं हौसलों का दम भरतीं