रविवार, 25 अक्तूबर 2009

जो लम्हात हमसे लिखवाते हैं

जज्बात हमसे लिखवाते हैं
है कोई न कोई तो बात
जो लम्हात हमसे लिखवाते हैं


अपने हाथों में जिन्दगी जितनी बच जाये
फिसले जाते हैं दिन रात
जो लम्हात हमसे लिखवाते हैं


अपना चेहरा ही नहीं जाता है पहचाना
हुई ख़ुद से यूँ मुलाकात
जो लम्हात हमसे लिखवाते हैं


रोये गाये भारी मन को हल्का करने
उतरे लफ्जों में हैं हालात
जो लम्हात हमसे लिखवाते हैं


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7 टिप्‍पणियां:

  1. अपना चेहरा ही नहीं जाता है पहचाना
    हुई ख़ुद से यूँ मुलाकात
    andaz achchha laga

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  2. उतरे लफ्जों में हैं हालात
    जो लम्हात हमसे लिखवाते हैं
    सही है ये अभिव्यक्तियाँ लम्हार ही लिखवाते हैं शुभकामनायें

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  3. बहुत बढ़िया लिखा है।
    कल सोमवार को इसे चरचा मे देख लीजिए।
    http://anand.pankajit.com/

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  4. आपके जज़्बात बहुत ख़ूब लिखवा लेते हैं आपसे.............

    मुबारक हो..........

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  5. रोये गाये भारी मन को हल्का करने
    उतरे लफ्जों में हैं हालात
    जो लम्हात हमसे लिखवाते हैं

    pataa nahi kitne hi diloN ki
    baat keh di aapne apni iss nazm meiN
    rachnaa kaamyaab hai
    badhaaee

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मैं भी औरों की तरह , खुशफहमियों का हूँ स्वागत करती
मेरे क़दमों में भी , यही तो हैं हौसलों का दम भरतीं