रविवार, 20 नवंबर 2011

वक्त ने हमको चुना

वक्त ने हमको चुना
चोट खाने के लिये

मंज़िलें और भी हैं
राह दिखाने के लिये

कौन जीता है भला
गम उठाने के लिये

वक़्त आड़ा ही सही
साथ बिताने के लिये

रफू करना कला है
जिन्दगी बचाने के लिये

उधड़ गए तो सिले
गले लगाने के लिये

हिला रहा है कोई
हमको जगाने के लिये

उठो , अहतराम कर लो
ताल मिलाने के लिये

16 टिप्‍पणियां:

  1. वक्त ने हमको चुना
    चोट खाने के लिये

    मंज़िलें और भी हैं
    राह दिखाने के लिये

    वाह! शानदार गजल....
    सादर बधाई...

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  2. रफू करना कला है
    जिन्दगी बचाने के लिये

    उधड़ गए तो सिले
    गले लगाने के लिये
    Bahut hee kamaal kee panktiyan hain!

    उत्तर देंहटाएं
  3. bahut achhee......

    जीवन
    जीना है तो
    लड़ना है
    लड़ना है तो
    चोट भी खाना है
    जीवन का अंत
    ऐसे ही होना है

    zakhm kkhaate rahnaa
    phir malham lagaane kaa
    silsilaa
    chaltaa rahaa hai
    chaltaa rahegaa

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  4. रफू करना कला है
    जिन्दगी बचाने के लिये

    वाह...दाद कबूल फरमाएं

    नीरज

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  5. मंज़िले और भी है
    रह दिखाने के लिए....
    वाह!!! बहुत खूब लिखा है आपने बधाई समय मिले कभी तो आयेगा मेरी पोस्ट पर आपका स्वागत है

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  6. रफू करना कला है
    जिन्दगी बचाने के लिये
    अच्छे शेर दाद कुबूल करें ...

    उत्तर देंहटाएं
  7. आपकी इस उत्कृष्ट प्रविष्टी की चर्चा कल मंगलवार के चर्चा मंच पर भी की जा रही है! आपके ब्लॉग पर अधिक से अधिक पाठक पहुँचेंगे तो चर्चा मंच का भी प्रयास सफल होगा।

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  8. आपके पोस्ट पर आकर अच्छा लगा । मेरे नए पोस्ट शिवपूजन सहाय पर आपका इंतजार रहेगा । धन्यवाद

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  9. आदरणीया शारदा अरोरा जी
    सस्नेहाभिवादन !

    वक्त ने हमको चुना
    चोट खाने के लिये

    मंज़िलें और भी हैं
    राह दिखाने के लिये

    वाऽऽह्… ! बहुत ख़ूबसूरत !

    बधाई और मंगलकामनाओं सहित…
    - राजेन्द्र स्वर्णकार

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  10. रफू करना कला है
    जिन्दगी बचाने के लिये
    वाह!

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  11. वक्त ने हमको चुना ...
    बह्हुत ही लाजवाब और बेहतरीन .... यथार्थ की प्रस्तुति है ...

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  12. उठो,अहतराम कर लो
    ताल मिलाने के लिये
    प्रेरित करती रचना.

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  13. waqt ne humko chuna...ye sawal uthta hai kabhi kabhi..sundar rachna

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  14. रफू करना कला है
    जिन्दगी बचाने के लिये

    उधड़ गए तो सिले
    गले लगाने के लिये


    हिला रहा है कोई
    हमको जगाने के लिये

    Achhe ashaar hai, badhai

    उत्तर देंहटाएं

मैं भी औरों की तरह , खुशफहमियों का हूँ स्वागत करती
मेरे क़दमों में भी , यही तो हैं हौसलों का दम भरतीं