सोमवार, 12 अक्तूबर 2020

इक धूप सी जमी है


इक धूप सी जमी है निगाहों के आस-पास 
गर ये आप हैं तो आपके कुर्बान जाइये 

आ ही गये हैं हम भी सितारों के देश में 
पलकों पे रखे ख़्वाब हैं,इनमें ही आप जरा आन मुस्कराइये 

शुरुआत थी इतनी हँसीं ,अन्जाम की खबर किसे 
दिलवालों की दुनिया में फ़ना होने का हुनर जान जाइये 

यूँ तो अक्सर सताते ही रहते हैं हमें आप 
दिल फिर भी चाहता है कि आँखों के आगे आप रहें ,मान जाइये 

अहमियत कितनी है किसी की ,ये कौन जानता 
ये फासलों की तालीम है ,जिगर के पास कौन है ,पहचान जाइये 

7 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी लिखी रचना "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" आज मंगलवार 13 अक्टूबर 2020 को साझा की गई है.... "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

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  2. बहुत ही सुंदर सराहनीय सृजन आदरणीय दी।
    सादर

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  3. सादर नमस्कार,
    आपकी प्रविष्टि् की चर्चा शुक्रवार ( 16-10-2020) को "न मैं चुप हूँ न गाता हूँ" (चर्चा अंक-3856) पर होगी। आप भी सादर आमंत्रित है.

    "मीना भारद्वाज"

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मैं भी औरों की तरह , खुशफहमियों का हूँ स्वागत करती
मेरे क़दमों में भी , यही तो हैं हौसलों का दम भरतीं