गुरुवार, 1 मई 2014

तो अपना क्या होगा

हम तो तुम्हारी पलकों के ख़्वाबों में भी रह लेते 
तुम जो आँखों को तरेरोगे तो अपना क्या होगा 

ख़्वाब तो आसमाँ में उड़ाते हैं 
तुम जो ज़मीं पर ही उतारोगे तो अपना क्या होगा 

इरादों में हौसलों की चमक होती है 
तुम जो हकीकत को नकारोगे तो अपना क्या होगा 

बन्जारों की तरह तम्बू नहीं ताना हमने 
दिल की बस्ती को उजाड़ोगे तो अपना क्या होगा 

हम तो तुम्हारी पलकों के ख़्वाबों में भी रह लेते 
तुम जो आँखों को तरेरोगे तो अपना क्या होगा 


शुक्रवार, 18 अप्रैल 2014

बुत किसे होना पड़ा

काँटों पे सोना पड़ा 
फूलों को रोना पड़ा 

दिल की लगी देखो 
नींदों को खोना पड़ा 

सफर लम्हों का है 
सदियों को ढोना पड़ा 

दीदारे-खुदा के लिये 
हस्ती को खोना पड़ा 

जन्मों का मैला मन 
असुँअन से धोना पड़ा 

गँगा की पावन लहर 
आस का दोना पड़ा 

किसकी हथेली पे जाँ 
बुत किसे होना पड़ा 


सोमवार, 31 मार्च 2014

जी भर कर तुम जल कर देखो

एक आस का दिया जला कर , कितने फूल खिलाये हमने 
मैं ही नहीं हूँ कायल इसकी , दुनिया भर से जा कर पूछो 

दीवाली सी जगमग होती , तम से भरी रात भी देखो 
बाती सँग तेल भी सार्थक होता , जी भर कर तुम जल कर देखो 

और चमन में क्या करना है , सूरज की अपनी महिमा है 
रँग जाते हैं उस रँग में , जिसके सँग तुम चल कर देखो 

सदियों से होता आया है , अक्सर दुख का खेल यहाँ 
अन्तर्मन में न उतरे जो , ऐसा सौदा ले कर देखो 

खुशबू भला कहाँ छुपती है , आँखें कर देती हैं चुगली 
इन्द्रधनुष सा खिल उठता है , फलक की सीढ़ी चढ़ कर देखो 

शनिवार, 22 मार्च 2014

सब्र का प्याला

 दर्द के घूँट और सब्र का प्याला 
साकी ने मेरा इम्तिहान ले डाला 

अपने हाथों से जो देता है रहमत 
उन्हीं हाथों से कहर दे डाला 

यकीन अब भी है , तेरे इम्तिहाँ ने 
इक नया मुकाम दे डाला 

दूर से माप रहा तू हौसला मेरा 
लो, मैंने भी तुझे पढ़ डाला 

इम्तिहाँ हैं तालीम का हिस्सा 
वक्त ने फैसला सुना डाला 

कभी तेरी ये सदा , कभी तेरी ये दवा 
पीना हमको है , शिकन न डाला 

साथी भी है , समाँ भी , सामाँ भी 
रूठी किस्मत की नजर कर डाला 

शुक्रवार, 14 फ़रवरी 2014

बर्फ है के चाँदनी है

वेलेन्टाइन डे की रात , प्रकृति ने बर्फ़बारी से नहला दिया सरोवर नगरी को , कुछ इस तरह .. 

बहुत इन्तज़ार करवाती हो तुम
कितनी ही बार खिड़की से झाँक कर देखा
और जब आती हो तो दबे पाँव ,
आहट भी नहीं करतीं
सब तरफ बिछ जाती हो 
बिल्कुल ज़िन्दगी की ही तरह
अब तुम्हारी चमक से
सारी दुनिया बदली हुई सी लगती है
ये मौसम की मेहरबानी है
सारा शहर पेड़-पौधे तेरे रँग में रँगे हुए से लगते हैं
बर्फ है के चाँदनी है ....सारी कायनात नहाई हुई सी लगती है
भीगी-भीगी मेरे मन की हालत की ही तरह

मंगलवार, 21 जनवरी 2014

18 jan.14,नैनीताल में स्नोफाल की अनुपम छटा

 ये कौन सी चाँदनी है लहराई हुई 
बिखर गई है सफेदी चारों तरफ बल खाई हुई 

ये मेरे शहर के घरों की छतों ने ओढ़ ली चादर 
जैसे के हो कोई नवेली शरमाई हुई 

मौसम का तकाज़ा है के बैठें घर में 
मन के पँछी को तो उड़ानें हैं भाई हुई 

कैद कर लेंगे इन नज़ारों को सीने में 
फिर अगले बरस आएगी ये रूत इतराई हुई 

आवाज नहीं करती है कुदरत 
चुपचाप है ये मेहर कहाँ से आई हुई 

हम टँगे हैं अपनी खिड़की पर 
देख रहे हैं परत-दर-परत चाँदनी तहाई हुई 


मौसम का पारा तो गिर गया है बहुत 
मगर आँखों की बहुत सिकाई हुई 

लोग गिरते-पड़ते ,उछालते बर्फ के गोले 
इस बहाने भी कोई मस्ती है हाथ आई हुई 

बर्फ के फूल खिले हैं हर चेहरे पर 
ये धूप है हर आँगन में समाई हुई   

रविवार, 5 जनवरी 2014

मन मैला तो कौन खुदा

मन मैला तो कौन खुदा 
रहता है तू ,खुद से भी ज़ुदा 

आना है मेरे पास तो , किसी रूह की तरह आ 
इस तन को चोगे की तरह , किसी खूँटी पर टाँग के आ 

मन मैला तो कौन खुदा 
रहता है तू ,खुद से भी ज़ुदा

प्यास जन्मों से लगी है ,बुझेगी ये भरम है तुझको 
अपने ही सामने तू , किसी गैर की तरह आ 

मन मैला तो कौन खुदा 
रहता है तू ,खुद से भी ज़ुदा

दिल लताड़ने के लिये नहीं होते ,किसी खुशबू सा 
चमन में ठण्डी हवा के झोंके की तरह आ 

मन मैला तो कौन खुदा 
रहता है तू ,खुद से भी ज़ुदा