सोमवार, 18 अगस्त 2014

ये चाहतों का सफर

ज़िन्दगी एक तन्हा सफ़र है गोया 
हर कदम राह में यार की उठता हो गोया 

उसके आने से महकता है समाँ 
उसकी मेहरबानी भी सँग-सँग हो गोया

करवटें बदलती रहती हूँ मैं 
नीँद उसको भी तो आ गई हो गोया

वक्त के बेरहम हाथों ने बख़्शा किसे 
हर सीने में नमी ही तैरती हो गोया

ये चाहतों का सफर ले आया है 
इक जँग खुद से भी छिड़ी हो गोया

वो मेरा दोस्त है तो दुश्मनी क्यूँ-कर 
दिए के साथ-साथ कोई हवा हो गोया

शुक्रवार, 27 जून 2014

मेरे लई ते राताँ ने सारियाँ

वे चन्ना , किस कम्म दिआं ऐ महल ते माड़ियाँ 
तेरे बाज्यों सब ने विसारिआं 
केहड़े पासेओं दिन ऐ चढ़दा 
मेरे लई ते राताँ ने सारियाँ 

सुंजियाँ मेरियाँ दिल दियाँ राहाँ 
देके विखाली लुक्क गया कोई 
टक्करां मारन अक्खाँ मेरियाँ 

रोंदी होई हस्स पैन्नी हाँ 
किस थां जावाँ रूह पुच्छदी ऐ 
पिंजर मेरा डोराँ तेरियाँ 

गम साथी ने घर मेरा तक्कया 
फुल्ल बहुतेरे खुशबू नदारद 
दुनियावी गल्लाँ मुक्क गइयाँ सारियाँ

वे चन्ना , किस कम्म दिआं ऐ महल ते माड़ियाँ 
तेरे बाज्यों सब ने विसारिआं 
केड़े पासेओं दिन ऐ चढ़दा 
मेरे लई ते राताँ ने सारियाँ 

मंगलवार, 6 मई 2014

पढ़े , तेरे खत फिर से

बरसों बाद पढ़े , तेरे खत फिर से 
वही मौसम गुजरा है , इक बार इधर फिर से 

वो जो धूप जमी थी, निगाहों के आस-पास 
तेरे चेहरे पे झिलमिलाती हुई , दिखी है इधर फिर से 

छोड़ आई थी जो पीछे , वो अल्हड़ सी जवानी 
जागी हैं वही नादानियाँ , देखो तो इधर फिर से 

रस्मों के सहारे से , महबूब बने तुम 
मेरी दुनिया दिल से , चली है इधर फिर से 

कौन जाने किसके खतों का , अन्जाम हो क्या 
दफ़न हों सीने में या जी उट्ठे ,लम्हा-लम्हा इधर फिर से 

दुनिया से छुपा कर , लिक्खा था जिन्हें 
फूल बन कर खिले हैं वही , महके हैं इधर फिर से 

गुरुवार, 1 मई 2014

तो अपना क्या होगा

हम तो तुम्हारी पलकों के ख़्वाबों में भी रह लेते 
तुम जो आँखों को तरेरोगे तो अपना क्या होगा 

ख़्वाब तो आसमाँ में उड़ाते हैं 
तुम जो ज़मीं पर ही उतारोगे तो अपना क्या होगा 

इरादों में हौसलों की चमक होती है 
तुम जो हकीकत को नकारोगे तो अपना क्या होगा 

बन्जारों की तरह तम्बू नहीं ताना हमने 
दिल की बस्ती को उजाड़ोगे तो अपना क्या होगा 

हम तो तुम्हारी पलकों के ख़्वाबों में भी रह लेते 
तुम जो आँखों को तरेरोगे तो अपना क्या होगा 


शुक्रवार, 18 अप्रैल 2014

बुत किसे होना पड़ा

काँटों पे सोना पड़ा 
फूलों को रोना पड़ा 

दिल की लगी देखो 
नींदों को खोना पड़ा 

सफर लम्हों का है 
सदियों को ढोना पड़ा 

दीदारे-खुदा के लिये 
हस्ती को खोना पड़ा 

जन्मों का मैला मन 
असुँअन से धोना पड़ा 

गँगा की पावन लहर 
आस का दोना पड़ा 

किसकी हथेली पे जाँ 
बुत किसे होना पड़ा 


सोमवार, 31 मार्च 2014

जी भर कर तुम जल कर देखो

एक आस का दिया जला कर , कितने फूल खिलाये हमने 
मैं ही नहीं हूँ कायल इसकी , दुनिया भर से जा कर पूछो 

दीवाली सी जगमग होती , तम से भरी रात भी देखो 
बाती सँग तेल भी सार्थक होता , जी भर कर तुम जल कर देखो 

और चमन में क्या करना है , सूरज की अपनी महिमा है 
रँग जाते हैं उस रँग में , जिसके सँग तुम चल कर देखो 

सदियों से होता आया है , अक्सर दुख का खेल यहाँ 
अन्तर्मन में न उतरे जो , ऐसा सौदा ले कर देखो 

खुशबू भला कहाँ छुपती है , आँखें कर देती हैं चुगली 
इन्द्रधनुष सा खिल उठता है , फलक की सीढ़ी चढ़ कर देखो 

शनिवार, 22 मार्च 2014

सब्र का प्याला

 दर्द के घूँट और सब्र का प्याला 
साकी ने मेरा इम्तिहान ले डाला 

अपने हाथों से जो देता है रहमत 
उन्हीं हाथों से कहर दे डाला 

यकीन अब भी है , तेरे इम्तिहाँ ने 
इक नया मुकाम दे डाला 

दूर से माप रहा तू हौसला मेरा 
लो, मैंने भी तुझे पढ़ डाला 

इम्तिहाँ हैं तालीम का हिस्सा 
वक्त ने फैसला सुना डाला 

कभी तेरी ये सदा , कभी तेरी ये दवा 
पीना हमको है , शिकन न डाला 

साथी भी है , समाँ भी , सामाँ भी 
रूठी किस्मत की नजर कर डाला