शुक्रवार, 24 अप्रैल 2026

धरती फूलों वाली

 

हम चल तो लेते इठला के मगर 

कोई धरती फूलों वाली न हुई 


फ़िज़ाएँ इत्र सी महकती तो रहीं 

बस हवा ही मेहर वाली न हुई 


खुल जाते हम दो-चार मुलाक़ातों में 

कोई आँख चाहने वाली न हुई 


चलना था साहिल तक हमको 

और राह कोई भी सवाली न हुई 


टेढ़े रहना था आँगन को 

और चाल भी बस मतवाली न हुई 


काँटों से हमने कर ली यारी 

अब झोली भी अपनी ख़ाली न हुई 


5 टिप्‍पणियां:

Digvijay Agrawal ने कहा…

 आपकी लिखी रचना "पांच लिंकों के आनन्द में सोमवार 27 एप्रिल, 2026
को लिंक की जाएगी ....  http://halchalwith5links.blogspot.in पर आप भी आइएगा ... धन्यवाद!
  

नूपुरं noopuram ने कहा…

नज़रिया बदलने की बात हुई !

Sudha Devrani ने कहा…

वाह!!!
क्या बात..
बहुत सुन्दर गजल ।

Anita ने कहा…

वाह!! बहुत सुंदर

शारदा अरोरा ने कहा…

आप सभी का बहुत बहुत धन्यवाद