मंगलवार, 23 दिसंबर 2025

शर्तों पर

दोस्ती शर्तों पर ,वफ़ा शर्तों पर 
पी रहे हैं जैसे कोई अज़ाब शर्तों पर 

चलता तो है हर कोई दिल से 
दिल है या है कोई मजाक शर्तों पर 

रंगे-हिना की मस्ती में जो न डूबे 
भला खिलता है दिल का गुलाब शर्तों पर 

बेवफ़ाई है गर मुहब्बत का दूसरा नाम 
खाई है दोनों तरफ़ जनाब शर्तों पर 

चढ़ता उतरता रहता है ख़ुमार बेशक 
कहाँ मिटता है दरिया-ए-चनाब शर्तों पर 

9 टिप्‍पणियां:

Pammi singh'tripti' ने कहा…


आपकी लिखी रचना ब्लॉग "पांच लिंकों का आनन्द" बुधवार 15 जनवरी 2026 को साझा की गयी है......... पाँच लिंकों का आनन्द पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!
अथ स्वागतम शुभ स्वागतम।

M VERMA ने कहा…

सुन्दर

Bharti Das ने कहा…

बहुत सुंदर

जितेन्द्र माथुर ने कहा…

बहुत खूब शारदाजी!

सुशील कुमार जोशी ने कहा…

सुंदर

जयकृष्ण राय तुषार ने कहा…

बहुत अच्छी ग़ज़ल. सादर अभिवादन

शारदा अरोरा ने कहा…

आप अभी की हौसला अफ़ज़ाई का बहुत बहुत शुक्रिया

हरीश कुमार ने कहा…

बहुत सुंदर

Admin ने कहा…

शर्तों पर आधारित दोस्ती और मोहब्बत का जो भाव आपने बयां किया है, वह बहुत सच्चा और गहरा है। पढ़ते समय मुझे अपने कुछ पुराने दोस्तों और रिश्तों की याद आ गई, जहाँ कभी-कभी परिस्थितियाँ भावनाओं के आगे भारी पड़ जाती थीं।