शुक्रवार, 31 जुलाई 2026

आनी-जानी शय


धूप आनी-जानी शय है 

आज़मा कर देखिए 


अपने दम पर छाया को ख़ुद 

घर बुला कर देखिए 


आएगी ख़ुशबू ही ख़ुशबू 

बस जरा हस्ती मिटा कर देखिए 


रोक लेते काँटे रास्ता 

फूलों को अपना बना कर देखिए 


मजबूरी में हमने तुमने लाख पी डाले गरल 

एक ग़म ही ख़ुश हो कर सीने से लगा कर देखिए 


हिल जाएगी सारी इमारत 

नींव का बस एक ही पत्थर हिला कर देखिए 



7 टिप्‍पणियां:

Digvijay Agrawal ने कहा…

हिल जाएगी सारी इमारत
बस नीव के उंगली दिखाइए
शानदार
वंदन

Digvijay Agrawal ने कहा…

 आपकी लिखी रचना "पांच लिंकों के आनन्द में  सोमवार 03अगस्, 2026 को लिंक की जाएगी ....  http://halchalwith5links.blogspot.in  पर आप भी आइएगा ... धन्यवाद!

सुशील कुमार जोशी ने कहा…

सुंदर

Anita ने कहा…

सुंदर सृजन

Onkar ने कहा…

सुंदर प्रस्तुति

हरीश कुमार ने कहा…

बहुत सुंदर

शारदा अरोरा ने कहा…

सभी का बहुत शुक्रिया