बुधवार, 11 जुलाई 2018

आया है एक मेहमाँ

I wrote this for my son inlaw for the wedding day...
आया है एक मेहमाँ
जादू सा कोई अरमाँ
साँसों ने छेड़ी सरगम
खिला दिल का यूँ गुलिस्ताँ

रँगों ने हवाओं में इक शय सी मिला दी है
और फिज़ाओं ने महफिल भी सजा ली है
सीने में धड़कता दिल ,आँखों को मिली जुबाँ
आया है एक मेहमाँ

गालों की रंगत ने हर बात बता दी है
बस एक पिया की गली ,फूलों को दिखा दी है
अरमान जगे हों जब ,महफिल है सारी जवाँ
आया है एक मेहमाँ

घोड़ी पर आओगे अरमानों की गलियों में
दुल्हन ने हाथों में, मेहँदी भी रचा ली है
सेहरे की लड़ियों ने मुस्कान दिखा दी है
महके हैं सारे दिल, महका है सारा समाँ
आया है एक मेहमाँ

4 टिप्‍पणियां:

मैं भी औरों की तरह , खुशफहमियों का हूँ स्वागत करती
मेरे क़दमों में भी , यही तो हैं हौसलों का दम भरतीं