रविवार, 9 अक्तूबर 2011

अहसास की कहन

जिसे जी कर लिखा हो वो छन्द कैसे हो
आड़े टेढ़े रास्ते पर चल कर सिर्फ मकरन्द कैसे हो

जिन्दगी फूलों सी भी हो सकती है
मगर काँटों की चुभन मन्द कैसे हो

अशआर पकड़ते हैं जब जब कलम
अहसास की कहन चन्द कैसे हो

दिया बुझे या जले दिले-नादाँ का
राख तले शोलों की अगन बन्द कैसे हो

गाने लगते हैं सुर में जब जब दर्द-औ-गम
इक सदा गूँजती है मगर दिल बुलन्द कैसे हो

फलसफे जिन्दगी के दिनों-दिन आते हैं समझ
छाले क़दमों तले जुबाँ पे मखमली पैबन्द कैसे हो

12 टिप्‍पणियां:

  1. फलसफे जिन्दगी के दिनों-दिन आते हैं समझ
    छाले क़दमों तले जुबाँ पे मखमली पैबन्द कैसे हो

    उफ़ …………क्या कुछ नही कह दिया……………बहुत सुन्दर भावो को संजोया है।

    जवाब देंहटाएं
  2. जिन्दगी फूलों सी भी हो सकती है
    मगर काँटों की चुभन मन्द कैसे हो

    बहुत सुन्दर
    सादर

    जवाब देंहटाएं
  3. फलसफे जिन्दगी के दिनों-दिन आते हैं समझ
    छाले क़दमों तले जुबाँ पे मखमली पैबन्द कैसे हो
    ज़िन्दगी ऐसे दिन भी दिखाती है जब पांवों में छले हों और मुख पे मुस्कान सजाना होता है।

    जवाब देंहटाएं
  4. फलसफे जिन्दगी के दिनों-दिन आते हैं समझ
    छाले क़दमों तले जुबाँ पे मखमली पैबन्द कैसे हो.

    बहुत सुंदर भाव. सुंदर प्रस्तुति. बधाई.

    जवाब देंहटाएं
  5. फलसफे जिन्दगी के दिनों-दिन आते हैं समझ
    छाले क़दमों तले जुबाँ पे मखमली पैबन्द कैसे हो .bahut hi badi baat bahut hi saral par sacche shabdon me....

    जवाब देंहटाएं
  6. फलसफे जिन्दगी के दिनों-दिन आते हैं समझ
    छाले क़दमों तले जुबाँ पे मखमली पैबन्द कैसे हो
    बेहतरीन अभिव्‍यक्ति ।

    जवाब देंहटाएं
  7. अशआर पकड़ते हैं जब जब कलम
    अहसास की कहन चन्द कैसे हो
    बहुत खूब!

    जवाब देंहटाएं
  8. फलसफे जिन्दगी के दिनों-दिन आते हैं समझ
    छाले क़दमों तले जुबाँ पे मखमली पैबन्द कैसे हो ..behtarin panktiyan..sadar badhayee

    जवाब देंहटाएं
  9. आपकी लेखनी में एक जादू है जो किसी अपरिचित को अपनी ओर खिंच ही लती है | धन्यवाद |VISIT HERE... http://www.akashsingh307.blogspot.com/

    जवाब देंहटाएं
  10. जिन्दगी फूलों सी भी हो सकती है
    मगर काँटों की चुभन मन्द कैसे हो
    सुंदर!

    जवाब देंहटाएं
  11. जिन्दगी फूलों सी भी हो सकती है
    मगर काँटों की चुभन मन्द कैसे हो
    Bahut khoob

    जवाब देंहटाएं

मैं भी औरों की तरह , खुशफहमियों का हूँ स्वागत करती
मेरे क़दमों में भी , यही तो हैं हौसलों का दम भरतीं