मंगलवार, 11 अगस्त 2026

काश

 

काश कोई तो हमनवाँ होता 

दिल इतना न धुआँ-धुआँ होता 


कोई पहल तो की होती 

फ़ासला इतना न दरमियाँ होता 


ज़हन से निकला ही नहीं 

साथ यादों का कारवाँ होता 


कोई तो जमीं बच रहती 

वक़्त इतना तो मेहरबाँ होता 


अपने ही दुखाते दिल को 

दिल इतना भी ना पशेमा होता 


वक़्त सज तो सकता था 

बाहों में कोई तो आसमाँ होता