शुक्रवार, 19 जून 2009

निशानी तेरी मेरे पास

चेहरा चमकता है सिन्दूरी आभा से
ये ही बेहतर निशानी तेरी मेरे पास

दिलों के मिलने के सबब होते हैं थोड़े
लम्बे रास्तों में जगमगाते हैं साथ-साथ

दूरियाँ कितनी भी हों चाहे भले
फासले दिलों के हों तो कर जाते हैं उदास

जगते मद्धिम दीये हों जैसे
तेरे ख्याल की रोशनी के साथ साथ

दिल को पढना हो पढ़ लो इसी रँग को
चेहरे पे छपा होता है अनगिनत रंगों के साथ


शनिवार, 6 जून 2009

इश्क वफ़ा की सीढियाँ चढ़ कर

इश्क वफ़ा की सीढियाँ चढ़ कर
चुन लाये कुछ उजली किरणें
हुस्न के माथे ताज सजे फ़िर
जन्मों का सारा दुःख भूले

रात की चाँदनी वफ़ा के दम पर
दिन का सेहरा इश्क के सर पर
इश्क जो चढ़ता सूरज सा ही
कैसे अपने आप को भूले

वफ़ा की चाहत है सबको ही
चाहत है पर वफ़ा नहीं है
सच्चा है पर सगा नहीं है
अपनी हस्ती आप ही भूले


सोमवार, 25 मई 2009

उम्र के हाथों छला गया है

आज का दिन भी नया नहीं है
बचपन याद से गया नहीं है
अल्हड़ है ये अब भी बेशक
उम्र के हाथों छला गया है

मैंने चाहा गीत मैं गा लूँ
सूरज से इक किरण चुरा लूँ
माथे में इक सोच बसा लूँ
अंगने में सूरज जो खड़ा है

प्यार का उबटन , वफ़ा की खुशबू
क्यों न मैं मल-मल के नहा लूँ
मेरा चाँद-खिलौना भी तू
मेरे माथे ताज जड़ा है


बुधवार, 20 मई 2009

भरम न हो तो

वो साथ नहीं आयेगा , साथ चलने का भरम होता है
भरम न हो तो ये दिल तन्हाँ होता है

दिल टूटे या सलामत रहे , भरम को साबुत रख कर
चलने की वजह बनता है

चारों ओर जो तू ही तू है , मेरी हस्ती क्या है
और बता कैसे गुमाँ बनता है

सुबहों को शामों में ढलते देख रही हूँ , दिल जला कर ही सही
मेरे हिस्से में कुछ तो उजाला होगा

मंगलवार, 5 मई 2009

क़दमों में ख़म माँगा


तकता था , सिसकता था
दुनिया ने कहाँ बाँधा ?

जुबाँ को शब्द नहीं थे
शब्दों ने है कुछ बाँचा

अरमानों और हकीकत को
कहाँ कहाँ जाँचा

तेरी उँगली पकड़ने को
तेरा ही साथ माँगा

सर रख के जो ये रोता
कब मिला कोई काँधा

ऊँची-नीची डगर पर
माली ने है कुछ राँधा

सपनों में मेरे आकर
क़दमों में है कुछ बाँधा

रुसवाइयों से डर कर
वीरानों ने समाँ बांधा

अच्छा है कोई नहीं जानता
उपहारों में है क्या बाँधा

उपहारों की गिनती कम है क्या
हौसलों में दम माँगा

अपने ही चलने की खातिर
क़दमों में ख़म माँगा

सोमवार, 27 अप्रैल 2009

तेरी हर बात

तेरी हर बात बहाने से शुरू होती है
कैसे पायेगी सिला
उथली है , उड़ी होती है
ठगे से देखते हैं , पलकें झुकती भी नहीं

कैसे करते हम गिला
वफाओं का बाग़ मिलता नहीं

रूठा रूठा सा चमन
खुशबू का ख्वाब खिलता नहीं

तेरी हर बात बहाने से शुरू होती है
देखें किस ओर ले जाती है ये

तेरे झूठे बहानों में
मुझसे मिलने का सच भी तो छुपा होता है
तेरी हर बात....


sharda4.mp31550K Play Download
आवाज में

शुक्रवार, 24 अप्रैल 2009

मेरे माही ते चानणे दा रँग इक

ये गीत कुछ इस इरादे से लिखा कि पंजाबी का गाना बन सके ....

डीवा बाल के चुबारे उत्ते रक्खाँ
जिया बाल के हनेरे उत्ते रक्खां
मेरे माही ते चानणे दा रंग इक
कदे नच्चाँ ते कदे मैं टप्पाँ


1.ओ चढ़दा ऐ पूरब पासेओं
दिल दी पतली गली दे रा तों
चुम लैन्दा ऐ बदली सारी
मेरे अरमाँ दी बाँ फड़ फड़ के


२.राताँ कट्टा मैं नाले उडीकाँ
पन्गे लवाँ मैं नाल हवावाँ
आसाँ दियाँ पीन्गा पावाँ
माही आवे ते नाल झुलावे


३.शर्म हया दियाँ सारियाँ गल्लाँ
कह छड़दियाँ ने मेरियाँ अक्खाँ
केडे पासे मैं जाके लुक्कां
चारों पासे ने चानणे उसदे



इसका हिंदी अनुवाद है


दिया जला के चौबारे के ऊपर रखूँ

जिया जला के अँधेरे के ऊपर रखूँ
मेरे सनम और उजाले का रंग है एक
कभी नाचूँ और कभी मैं कूदूँ


१. वो चढ़ता है पूरब की ओर से
दिल की पतली गली की राह से
चूम लेता है बदली सारी

मेरे अरमानों की बाँह पकड़ पकड़ के

२.रातें काटूं मैं साथ इंतज़ार के
पन्गे लूँ मैं साथ हवाओं के
आशाओं के झूले डालूँ
सनम आये और साथ झुलाए


३.शर्म हया की सारी बातें
कह देतीं हैं मेरी आँखें
किस तरफ मैं जाकर छुपूँ
चारों ओर हैं उसके उजाले