शनिवार, 11 जुलाई 2026

नग़मे


नग़मे जो गाये नहीं गए 

वक़्त की धुन पे बजाए नहीं गए 

फूल झरते रहे डालियों से 

ज़ुल्फ़ों में सजाए नहीं गए 


वक़्त की नज़र पड़ी ही नहीं 

सफ़हे से उतरे तो उतर गए दिल से 

उजड़े घर फिर बसाए नहीं गए 


लाख कोशिशें हों मुक़द्दर से किसी की 

पसीजा जो न वही लम्हा तो 

किसी छाँव से बहलाए नहीं गए 


अपनी भी ज़िद ही रही 

हमें सूरज की थी दरकार 

जुगनुओं से हम बहलाए नहीं गए 


वक़्त आता है तो तन्हाइयाँ भी सजती हैं 

जी उठते हैं हज़ार अक्सों में 

वक़्त की छाँव से जो दोहराए नहीं गए 

6 टिप्‍पणियां:

Digvijay Agrawal ने कहा…

 आपकी लिखी रचना "पांच लिंकों के आनन्द में गुरुवार 16 जुलाई, 2026 को लिंक की जाएगी ....  http://halchalwith5links.blogspot.in  पर आप भी आइएगा ... धन्यवाद!

रेनूप्रिया ने कहा…

सुंदर , जीना इसी का नाम है ।

M VERMA ने कहा…

Wahhh
बहुत सुंदर रचना

हरीश कुमार ने कहा…

वाह बेहतरीन रचना

सुशील कुमार जोशी ने कहा…

वाह

शारदा अरोरा ने कहा…

सभी का धन्यवाद