कभी दोस्त बन के आइए
जिगर में ही समाइये
कसक सी उठती है दिल में
यूँ न हमें आज़माइए
मीलों तक जो फैला
सहरा भला रास आता किसे
दिल में भर के बस थोड़ी सी वफ़ा
आँखों से जगमगाइए ,टिमटिमाइये
फ़िज़ाँ में रंग भरिए
गुलों को ही महकाइए
खिल जाएँगे सारे सब्ज़-बाग
ख़ुशबू-ए-अहसास संग लाइये
साजेदिल अजीब है
बस जरा सा गुनगुनाइए
बज उठती हैं धड़कनें
दिल को ही बजाइए , दोस्त बन के आइए


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