भारी भरकम लफ्जों की पढ़ाई भी नहीं ,
गीत गज़लों की गढ़ाई की तालीम भी नहीं ,
है उम्र की चाँदी और जज्बात के समन्दर की डुबकी,
किस्मत लिखने वाले की मेहरबानी ,
जिन्दगी का सुरूर , चन्द लफ्जों की जुबानी...
दिल में जगह रख कर मिलते हैं फ़िर भी क्यों साथ चलना इन्हें गवारा नहीं होता आड़े आ जाती है आन , बान और शान जिसका खोना या कम होना , इन्हें गवारा नहीं होता _अपने जैसे दिलों को दिल पहचान लेता है बड़ी मुश्किल से राहें साथ चलती हैं राहों को सजा ले तू , राहों का ठिकाना नहीं होता _वो जो जन्मों से प्यासे हैं समा जाते हैं जानों में , राहों की रज़ा बनकर रज़ाओं का ठिकाना नहीं होता _मुसाफिरी है तेरी भी मेरी भी हाथों में पकड़ ले हाथ , झूठे आसरे , आडम्बर सहारों का भरोसा नहीं होता अपने जैसे दिलों को दिल पहचान लेता है
चाँद उगा आसमान में मौसम सारा निखरा आया मुट्ठी भर रोशनी लेकर चाँदी-चाँदी बिखरा आया
उछलें हैं लहरें , मिलने को सागर में यूँ तूफ़ान आया टूटें न किनारे अरमाँ के ऐसे ही ये मेहमान आया दल-बल अपने साथ लिये तारों की थाली भर लाया चमकें हैं सितारे आंखों में साजिश ये कैसी कर लाया
एक रिटायर्ड चार्टर्ड एकाउंटेंट बैंक एक्जीक्यूटिव अब प्रैक्टिस में ,की पत्नी , इंजिनियर बेटी, इकोनौमिस्ट बेटी व चार्टेड एकाउंटेंट बेटे की माँ , एक होम मेकर हूँ | कॉलेज की पढ़ाई के लिए बच्चों के घर छोड़ते ही , एकाकी होते हुए मन ने कलम उठा ली | उद्देश्य सामने रख कर जीना आसान हो जाता है | इश्क के बिना शायद एक कदम भी नहीं चला जा सकता ; इश्क वस्तु , स्थान , भाव, मनुष्य, मनुष्यता और रब से हो सकता है और अगर हम कर्म से इश्क कर लें ?मानवीय मूल्यों की रक्षा ,मानसिक अवसाद से बचाव व उग्रवादी ताकतों का हृदय परिवर्तन यही मेरी कलम का लक्ष्य है ,जीवन के सफर का सजदा है|